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Saturday, September 18, 2021

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14 तालमखाना के फायदे | तालमखाना खाने का तरीका

तालमखाना क्या है

  • तालमखाना को कोकिलाक्ष भी कहते हैं। यह एक औषधीय पौधा है ज्यादातर इसके बीज का उपयोग आयुर्वेदिक दवाइयों में किया जाता है। तालमखाना कंटीला पौधा होता है जो नदी, तालाब के किनारे मिलता है। आयुर्वेद में इसके बीजों का उपयोग कई बीमारियो से छुटकारा पाने के लिए किया जाता है।
  • यौन संबंधी रोगों को ठीक करने में तालमखाने का उपयोग किया जाता हैं। इसका उपयोग सूजन, गठिया, मूत्र रोग, पीलिया, पेट संबंधी रोग, पेट का फूलना , मूत्र का रुकना , जलन, आमवात या गठिया, प्रमेह या मधुमेह, आँखों के बीमारियाँ तथा रक्तदोष जैसी परेशानियों में किया जाता है। तालमखाने की जड़ भी कई रोगों को ठीक करने में मदद करती है। यह सूजन, पाइल्स, प्यास, पित्त संबंधी समस्या, विष, दर्द को कम करने में मदद करता है।

तालमखाना के अन्य नाम

  • तालमखाना को संस्कृत में कोकिलाक्ष बोलते हैं।
  • वानास्पतिक नाम Hygrophila Auriculata
  • अंग्रेजी में Marsh Barbel
  • हिंदी में तालमखाना, जुलीआकाण्टा
  • पंजाबी में तालमखाना
  • गुजराती में एखरो
  • उर्दू में तालिमखाना
  • तमिल में निरमुल्ली
  • बंगाली में कुलियाखारा
  • तेलगु में कोकिलाक्षी

तालमखाना में पोषक तत्व

  • तालमखाना में प्रोटीन की मात्रा 9.7 प्रतिशत मौजूद होता है जिसको पचाने में आसानी होता है|
  • कार्बोहाइड्रेट की मात्रा 76%, पानी की मात्रा 12.8% इसमें वसा की मात्रा ना के बराबर यानी कि 0.1 प्रतिशत, खनिज लवण की मात्रा 0.5%, आयरन 1.4/100 ग्राम, फास्फोरस की मात्रा 0.9% मौजूद होता है।

तालमखाना के फायदे (ताल मखाना खाने से क्या फायदा मिलता है?)

  • तालमखाना बहुत फायदेमंद होता है। इसका उपयोग कई तरह के बीमारियों के लिए उपचार में औषधि के रुप में किया जाता है।
  • सांस संबंधी बीमारी में लाभदायक है
  • अगर किसी को सांस संबंधी बीमारी है तो उसके लिए तालमखाना के बीज बहुत फायदेमंद होते हैं। सांस संबंधी बीमारी होने पर 2-4 ग्राम तालमखाना का चूर्ण बनाकर शहद तथा घी में मिलाकर खाए।

दस्त की समस्या होने पर

  • दस्त होने पर तालमखाने का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। दस्त की समस्या होने पर तालमखाने के बीज का चूर्ण दही के साथ मिलाकर खाए, आपको फायदा मिलेगा।

कमर दर्द और जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है|

  • कमर दर्द में तालमखाने का उपयोग बहुत फायदेमंद होता है। किसी को कमर दर्द और जोड़ों में दर्द है तो तालमखाना के पत्तों को पीसकर कमर या जोड़ो पर लेप करने से दर्द में आराम मिलता है।

खांसी होने पर

  • मौसम के बदलाव के कारण खांसी की समस्या हो जाती है तो तालमखाने के पत्तों का पाउडर बना ले, रोजाना 1-2 ग्राम पाउडर में शहद मिलाकर सेवन करे। खांसी की समस्या दूर हो जाएगी।

पेशाब से संबंधी रोग दूर करे

  • पेशाब से संबंधी रोग जैसे पेशाब का रुक-रुक कर आना, पेशाब करते समय जलन होना या पेशाब करते समय दर्द होना, आदि। अगर कोई पेशाब से संबंधी रोगो से छुटकारा पाना चाहते हैं तो उनके लिए तालमखाना बहुत फायदेमंद है। इसके लिए तालमखाना, गोखरू और अरंड की जड़ को पीसकर दूध में मिलाकर पिए। पेशाब से संबंधी रोगों से छुटकारा मिल जाएगा।

रक्त संबंधी बीमारियों में फायदेमंद है

  • अगर कोई रक्त संबंधी बीमारियों से परेशान हैं तो उनके लिए तालमखाना बहुत फायदेमंद हैं। रक्त संबंधी बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए 1-2 ग्राम तालमखाना के बीज के चूर्ण का सेवन पानी के साथ करे।

यौन संबंधी रोगों में फायदेमंद

  • अगर किसी को यौन संबंधी समस्या है तो उनके तालमखाने के बीज का चूर्ण का सेवन बहुत फायदेमंद है। लेकिन इस तरह की समस्याओं में आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

जलोदर रोग होने पर

  • जलोदर रोग में भी तालमखाना बहुत फायदेमंद होता है। इसीलिए जलोदर रोग होने पर तालमखाना की जड़ का काढ़ा बनाकर एक बार 10-20 मिली पिए। यह काढ़ा आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा।

नींद नही आने पर

  • अगर किसी को नींद बहुत कम आती है और वह नींद की गोली का सेवन करता है तो उनके लिए तालमखाना बहुत फायदेमंद होता है। तालमखाना की जड़ को पानी में उबालकर, उस पानी का सेवन करें। आपको नींद आने लगेगी|

गठिया रोग दूर करे

  • ज्यादातर लोगों को गठिया और जोड़ों में दर्द होने की परेशानी शुरू हो जाती है। उनके लिए तालमखाना बहुत फायदेमंद होता है। गठिया और जोड़ों के दर्द को दूर करने के लिए तालमखाना तथा गुडूची को समान मात्रा में लेकर उसका काढ़ा बना ले, 10-20 मिली काढ़े में 500 मिग्रा पिप्पली चूर्ण मिलाकर सेवन करें।

पीलिया में फादेमंद है

  • अगर किसी को पीलिया हुआ है और इसके लक्षणों से परेशान हैं तो तालमखाना का सेवन करे। तालमखाना के पत्तों का काढ़ा बनाकर, 15-20 मिली मात्रा में पिने से पीलिया रोग दूर हो जाता है।

मधुमेह रोग होने पर

  • मधुमेह होने पर तालमखाना के बीजों का काढ़ा बनाकर 15-30 मिली काढ़ा में मिश्री मिलाकर पिए, या फिर तालमखाना बीज चूर्ण में समान मात्रा में बला, गंगेरन व गोखरू चूर्ण मिलाकर रख लें। 2-4 ग्राम चूर्ण में समान मात्रा में मिश्री मिलाकर खाने से भी फायदा होता है

सेक्स क्षमता बढ़ती है

  • तालमखाने का सेवन सेक्स लाइफ को बेहतर बनाता है। तालमखाने के बीज, गोखरू, काली मूसली, शतावरी, चोपचीनी, बादाम, चिरौंजी, इलायची, खसखस, केशर, जायफल, जावित्री, तज को समान मात्रा में लेकर इनका चूर्ण बना लें। रोजाना दिन में दो बार 1-2 ग्राम चूर्ण को घी तथा शक्कर के साथ मिलाकर सेवन करें और गाय का गर्म दूध पियें।

पथरी होने पर

  • पथरी होने पर तालमखाना, गोखरू और अरंडी की जड़ के चूर्ण को दूध के साथ पिए, फायदा होगा।

स्पर्म स्तर बढ़ता है

  • पुरुषो में स्पर्म स्तर बढ़ाने के लिए तालमखाना बीज का चूर्ण ले और समान मात्रा में सफेद मूसली चूर्ण तथा गोखरू चूर्ण लेकर मिला ले। रोजाना 2-4 ग्राम चूर्ण को दूध के साथ पिए।

सूजन आने पर

  • शरीर के किसी अंग में सूजन है तो तालमखाना भस्म को गाय के पेशाब या जल के साथ सेवन करे।

तालमखाना खाने का तरीका

  • तालमखाना खाने का तरीका पहले ही बताया गया है। तालमखाना की जड़, पत्ता, बीज का उपयोग किया जाता है। किसी बीमारी में इसके सेवन से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से संपर्क जरूर करे।

तालमखाना कहां पाया जाता है?

  • भारत के मैदानी भागों, दलदली भूमि एवं तालाब के किनारे, उष्णकटिबंधीय हिमालय में भी पाया जाता है। तालमखाना तालाब, नदियों के आस-पास और जहां पर हमेशा पानी जमा हुआ रहता है या फिर गीली मिट्टी वाले जैसे स्थानों पर पाया जाता हैं।

तालमखाने और मखाने में अंतर

  • मखाने और तालमखाने दोनों अलग अलग हैं। मखाने पॉपकॉर्न की तरह दिखते है। लेकिन तालमखाने के बीज होते है जो तिल की तरह दिखते हैं। मखाने और तालमखाने के पौधे भी अलग अलग दिखते हैं। इनके फल भी अलग दिखते हैं।

References: https://www.onlymyhealth.com/health-benefits-of-talmakhana-in-hindi-1616760423

https://www.1mg.com/hi/patanjali/kokilaksha-benefits-in-hindi/

Lokesh Jangid
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