Slip disc treatment at home in Hindi | स्लिप डिस्क ट्रीटमेंट इन आयुर्वेद | स्लिप डिस्क की आयुर्वेदिक जड़ी बूटी | स्लिप डिस्क क्या है | Slip disc treatment at home in Hindi | स्लिप डिस्क ट्रीटमेंट इन आयुर्वेद

स्लिप डिस्क क्या है

  • स्लिप डिस्क, जिसे स्पाइनल डिस्क हर्निएशन भी कहा जाता है, कमर दर्द की समस्या है।
  • इसमें रीढ़ की हड्डी के चारों ओर की मांसपेशियों के लंबे समय तक ऐंठन और दर्द होता है और दबाव पड़ने के कारण रीढ़ की हड्डी के बीच की गद्दीदार डिस्क में दरार पड़ जाती है, तब यह समस्या पैदा हो जाती है।

स्लिप डिस्क के लक्षण

  • स्लिप डिस्‍क से प्रभावित हिस्‍से में दर्द, सुन्‍नपन और झनझनाहट महसूस होना है।
  • कमर की मांसपेशियां का कमजोर ही जाना
  • जांघ से नीचे तक पैरो में खींचाव होना
  • पैरो के तलवों में सुन्‍नपन और झनझनाहट महसूस होना है।

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स्लिप डिस्क के कारण

  • उम्र बढ़ने के साथ शरीर के ऊतकों में कमी आना स्लिप डिस्‍क का सामान्‍य कारण है।
  • रीढ़ की हड्डी और इंटरवर्टेब्रल डिस्क में चोट की वजह से भी ये समस्‍या हो जाती है।
  • शारीरिक क्रियाओं के लिए वात सबसे ज्‍यादा जरूरी होता है।
  • उम्र बढ़ने के साथ वात में असंतुलन एवं खराबी आने लगती है। जिससे शरीर के ऊतकों की गुणवत्ता और पुर्ननिर्माण में कमी एवं कई वात विकार होने लगते हैं।
  • इस स्थिति में वात में असंतुलन आने को स्लिप डिस्‍क का कारण माना जाता है।

स्लिप डिस्क का आयुर्वेदिक इलाज ( Slip disc treatment at home in Hindi )

1.स्‍वेदन

  • इस थेरेपी में अनेक तरीकों से पसीना लाया जाता है।
  • स्‍वेदन से शरीर की नाडियों को चौड़ा, ऊतकों में फंसे विषाक्‍त पदार्थ को पतला कर जठरांत्र मार्ग में लाया जाता है। यहां से विषाक्‍त पदार्थ को पंचकर्म थेरेपी की मदद से शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
  • इस थेरेपी से स्लिप डिस्क से छुटकारा मिल जाता है।
  • गर्म कपड़े, धातु की वस्‍तु या गर्म हाथों या सही जड़ी बूटियों से बनी पुल्टिस को प्रभावित हिस्‍से पर लगाकर स्‍वेदन किया जाता है। भाप या जड़ी बूटियों से युक्‍त गर्म तरल पदार्थ को प्रभावित हिस्‍से पर लगाकर भी स्‍वेदन कर्म किया जाता है।

2.स्‍नेहन

  • स्‍नेहन एक प्रकार की मालिश है जिसमें पूरे शरीर या स्लिप डिस्क से प्रभावित हिस्‍से की हर्बल तेलों से मालिश की जाती है।
  • इस थेरेपी से दर्द और बीमारी के अन्‍य लक्षणों से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • शरीर को चिकना करने के लिए ज्यादातर अभ्‍यंग तेल से मालिश की जाती है।
  • अभ्‍यंग खराब हुए वात को संतुलित और शांत करता है।
  • हड्डियों, ऊतकों और लिगामेंट्स को मजबूती देता है। यह हमारे दर्द को दूर करता है।
  • शरीर की बीमारी से लड़ने की प्राकृतिक क्षमता को बढ़ाता है।
  • अभ्‍यंग थकान को दूर कर शरीर एवं मस्तिष्‍क को आराम भी पहुंचाता है।

3.कटि बस्‍ती और ग्रीवा बस्‍ती

  • इस चिकित्‍सा में आटे से बने एक फ्रेम को प्रभावित हिस्‍से पर रखा जाता है और फिर उसके अंदर गर्म औषधीय तेल डाला जाता है।
  • एक निश्चित समय के लिए इस तेल को त्‍वचा के संपर्क में ही रखा जाता है और तेल के ठंडा होने पर उसे बदलते रहना होना है।
  • त्‍वचा को चिकना करके और उस पर पसीना लाकर अमा एवं बढ़े हुए दोष को साफ किया जाता है। इससे भारीपन, अकड़न और दर्द से राहत मिलती है। इसलिए ये चिकित्‍सा स्लिप डिस्‍क जैसी वात स्थितियों को नियंत्रित करने में बहुत उपयोगी है।

4.पिझिचिल

  • ये एक आयुर्वेदिक थेरेपी है इसमें अनुभवी थेरेपिस्‍ट गुनगुने हर्बल तेल से शरीर की मालिश करते हैं।
  • इसमें मरीज को लिटाकर और एक विशेष कुर्सी पर बिठाकर मालिश की जाती है।
  • इसका सही परिणाम पाने के लिए लगभग 10 दिन तक मालिश करनी चाहिए।

5.शिरोधारा

  • इस थेरेपी में औषधीय तरल पदार्थ को माथे के ऊपर से डाला जाता है।
  • व्‍यक्‍ति की स्थिति के आधार पर शिरोधारा के लिए तरल पदार्थ का उपयोग किया जाता है।

6.नास्‍य

  • इसमें हर्बल तरल पदार्थों को नाक के जरिए शरीर में डाला जाता है।
  • नाक को मस्तिष्‍क का द्वार माना जाता है इसलिए नाक में जो भी डाला जाएगा वो सीधा मस्तिष्‍क को प्रभावित करेगा।
  • ये स्लिप डिस्‍क के सबसे सामान्‍य लक्षणों में से एक गर्दन और कंधों में अकड़न को दूर करने में मदद करता है।

7.बस्‍ती

  • बस्‍ती एक आयुर्वेदिक एनिमा है। इसमें औषधीय तेलों और हर्बल काढ़े जैसे तरल पदार्थों को गुदा मार्ग के जरिए आंतों तक पहुंचाया जाता है।
  • इसमें आंतों को साफ किया जाता है। इस प्रकार शरीर से विषाक्‍त पदार्थ और बढ़े हुए दोष को निकाल दिया जाता है।

8.धान्‍यमल धारा

  • इस चिकित्‍सा में अनाज और आंवला से बने औषधीय तरल को प्रभावित हिस्‍से पर डाला जाता है।
  • इस औषधीय तरल को बनाने के लिए धान्‍यमल, नवार चावल (एक प्रकार का चावल), खट्टे फल, शुंथि और बाजरे को एक पोटली में बांधर पानी में उबाला जाता है। इस पानी को सामान्‍य तापमान में ठंडा कर के इससे धान्‍यमल धारा थेरेपी की जाती है।
  • आमतौर पर धान्‍यमल से उपचार 7 से 14 दिनों के लिए किया जाता है लेकिन मरीज की स्थि‍ति एवं जरूरत के आधार पर अधिक समय तक ये चिकित्‍सा दी जा सकती है।
  • इससे मरीज को स्लिप डिस्क से छुटकारा मिल जाता है।

स्लिप डिस्क की आयुर्वेदिक जड़ी बूटी

1.शुंथि

  • शुंथि चमत्‍कारिक जड़ी बूटी है। यह श्‍वसन और पाचन तंत्र में कार्य करती है।
  • त्रिदोष में असंतुलन के कारण पैदा हुए विकारों को नियंत्रित करने में मदद करती है।
  • यह वात विकारों के इलाज के लिए सेंधा नमक के साथ इसका इस्‍तेमाल किया जा सकता है।
  • ये दर्द और ऐंठन से राहत दिलाती हैं। पाचन शक्ति को बढ़ाती एवं कफ को कम करती है।
  • अर्क, पाउडर, गोली, काढ़े या पेस्‍ट के रूप में इसका सेवन किया जाता है।

2.रसना

  • कड़वे स्‍वाद वाली रसना शरीर में गर्मी और भारीपन में सुधार लाती है।
  • इसका इस्‍तेमाल संधिवात (ऑस्टियोआर्थराइटिस), अस्‍थमा, बुखार, सफेद दाग और खासी के इलाज में किया जाता है।
  • स्लिप डिस्‍क को नियंत्रित करने के लिए इसे गुनगुने पानी के साथ या डॉक्‍टर के बताए अनुसार ले सकते हैं।

3.अश्‍वगंधा

  • अश्‍वगंधा दर्द से राहत, ऊतकों को ठीक करने और मजबूती प्रदान करती है और इसी वजह से अश्‍वगंधा स्लिप डिस्‍क को नियंत्रित करने में असरकारी जड़ी बूटी है।

4.गुडूची ( गिलोय )

  • गुडूची में इम्‍युनिटी बढ़ाने और खून को साफ करने वाले गुण होते हैं।
  • यह शारीरिक शक्‍ति में सुधार लाती है और स्लिप डिस्‍क के उपचार में प्रमुख औषधियों के साथ सहायक थेरेपी के रूप में इसका इस्‍तेमाल किया जा सकता है।

स्लिप डिस्‍क के लिए आयुर्वेदिक औषधियां { स्लिप डिस्क ट्रीटमेंट इन आयुर्वेद }

1.दशमूल क्‍वाथ

  • इस द्रवीय मिश्रण को शलिपर्णी, प्रश्‍निपर्णी, अग्निमांथ, कष्‍मारी और गोक्षुरा जैसी सामग्रियों से बनाया गया है।
  • प्रमुख तौर पर इसका इस्‍तेमाल वात विकारों के इलाज में किया जाता है। साथ ही अव्‍यवस्थित या असंतुलित हुए सभी दोषों को संतुलित करने में भी इस्‍तेमाल किया जाता है।
  • दशमूल क्‍वाथ का इस्‍तेमाल गर्दन और कमर की अकड़न, खांसी और अस्‍थमा के इलाज के लिए किया जा सकता है।

2.वृहत वात चिंतामणि रस

  • इस औषधि को सुवर्ण (सोना), रौप्‍य (चांदी), अभ्रक, लौह (आयरन) और प्रवाल (लाल मूंगा) की भस्‍म को एलोवेरा में मिलाकर तैयार किया गया है।
  • ये सभी प्रकार के वात विकारों जैसे कि स्लिप डिस्‍क और संधिवात के इलाज में उपयोगी है।

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आयुर्वेद के अनुसार स्लिप डिस्क होने पर क्या करें और क्या न करें

क्‍या करें

  • सांस लेने और आराम करने वाले तरीके अपनाएं जिनमें योगासन जैसे कि भुजंगासन, अर्ध चक्रासन, उष्ट्रासन और सेतु बंधासन शामिल है।
  • रोज ध्‍यान करें।
  • गर्म पानी से नहाएं

क्‍या न करें

  • गरिष्‍ठ भोजन न करें जो आसानी से न पचता हो।
  • गतिहीन जीवनशैली से दूर रहें।
  • खाना खाने के बाद ज्‍यादा थकान वाला काम न करें।
  • ओवरईटिंग से बचें और ठंडे तापमान में ज्‍यादा न रहें।
  • ठंडे खाद्य और पेय पदार्थों का सेवन करने से बचें।

स्लिप डिस्क की आयुर्वेदिक औषधि के नुकसान

  • आंखों, नाक और मुंह से बहुत ज्‍यादा पानी आने पर नास्‍य कर्म नहीं लेना चाहिए।
  • गुदा में सूजन, आंतों में रुकावट और छेद एवं हैजा से ग्रस्‍त व्‍यक्‍ति को बस्‍ती कर्म की सलाह नहीं दी जाती है।
  • छाती में बहुत ज्‍यादा कफ या बलगम जमने की स्थिति में अश्‍वगंधा नहीं लेना चाहिए।
  • व्‍यक्‍ति की प्रकृति और लक्षणों के आधार पर ही दवा के प्रकार और खुराक का निर्धारण करना चाहिए। इसलिए बेहतर होगा कि आप खुद कोई दवा या जड़ी बूटी लेने से पहले अनुभवी चिकित्‍सक से सलाह लें।

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