प्रेगनेंसी में पपीता खाना चाहिए या नहीं | प्रेगनेंसी इंजेक्शन सचेडुले | प्रेगनेंसी में टिटनेस का इंजेक्शन कब लगता है |सोनोग्राफी कैसे करते है

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प्रेगनेंसी में सीताफल खाना चाहिए या नहीं

  • सीताफल सर्दियों के मौसम में आता है इसको प्रेगनेंसी में खाना बहुत फायदेमंद होता है। प्रेगनेंसी का कोई भी महीना हो सीताफल खा सकते हैं सीताफल को पूरी प्रेगनेंसी में खाना चाहिए। 1 दिन में केवल 100 ग्राम सीताफल का सेवन करना चाहिए इससे अधिक मात्रा में इसका सेवन नहीं करें। सीताफल में विटामिन सी, ए, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, पोटेशियम, कैल्शियम, विटामिन बी 6, फाइबर भी भरपूर मात्रा में होते हैं।
  • प्रेगनेंसी में सीताफल खाने के बहुत फायदे कुछ लोग बोलते हैं कि इससे गर्भपात हो जाता है ऐसा कुछ नही है इसके खाने के बहुत फायदे हैं

प्रेगनेंसी में सीताफल खाने के फायदे

  1. सीताफल खाने से प्रेगनेंसी में ब्लड प्रेशर की समस्या नहीं होती है।
  2. जिन महिलाओं को बार बार गर्भपात होने की समस्या है उन्हें सीताफल जरूर खाना चाहिए। सीताफल खाने से गर्भपात की समस्या नहीं होती है।
  3. जिन गर्भवती महिलाओं को उल्टी और चक्कर की समस्या है तो सीताफल खाने से इनको कम कर सकती है।
  4. इसमें विटामिन बी 6 होता है जो गर्भ में पल रहे बच्चे के पोषण के लिए बहुत अच्छा होता है। इससे शिशु का मानसिक और शारीरिक विकास बहुत तेजी से होता है।
  5. सीताफल में विटामिन ए और सी अच्छी मात्रा में होता है जिसके सेवन से गर्भ में पल रहे शिशु के बाल, आंखो और त्वचा का अच्छा विकास होता है।
  6. सीताफल खाने से बचे की हड्डियां और दांतो का विकास अच्छा होता है।
  7. समय से पहले डिलीवरी होना और बच्चे का कम वजन होना ये समस्या भी नही होती है।

प्रेगनेंसी में पपीता खाना चाहिए या नहीं

  • पका हुआ पपीता विटामिन सी और ई, फाइबर, फोलिक एसिड से भरपूर होता है। जो पपीता पूरी तरह से पका हुआ है वह गर्भवती महिलाओं में विटामिन सी और ई, फाइबर, फोलिक एसिड की पूर्ति कर देता है। पपीता थोड़ा भी कच्चा नहीं होना चाहिए कच्चा पपीता गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक होता है।
  • बाजार हो पपीते मिलते हैं उनका पता नही कैसे पकाते हैं जो बाहर से पीले रंग के दिखते हैं। लेकिन अंदर से बहुत टाइट होते हैं ये नेचुरल तरीके से नही पकाए जाते हैं इसीलिए टाइट होते हैं जो कच्चे पपीते की तरह ही होते हैं इसीलिए प्रेग्नेंसी में पपीता बिलकुल भी नहीं खाना चाहिए। अगर कोई नेचुरल तरीके से पका है और अंदर से भी टाइट नही है तो पपीता खा सकते हैं।

प्रेगनेंसी में कच्चा पपीता खाने से क्या होता है

  • प्रेगनेंसी में कच्चा पपीता नहीं खाना चाहिए कच्चे पपीता में लेटिक्स नमक पदार्थ निकलता है। कच्चा पपीता खाने से गर्भाशय में संकुचन होने लगता है, गर्भ के अंदर की परत सिकुड़ने लगती है जिससे गर्भपात भी हो सकता है।

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प्रेगनेंसी में टिटनेस का इंजेक्शन कब लगता है

  • टिटनेस एक बीमारी है जिसका कोई इलाज नहीं है इसका टीका लगाकर इस से बच सकते हैं। यह एक बैक्टीरिया होता है यह धूल और मिट्टी में रहता है जो आसानी से शरीर में प्रवेश कर जाता है।
  • यदि आपको किसी तरह की चोट लग गई हो और घाव हो गया हो, जो खुला हो तो आपको बहुत आसानी से टिटनेस की समस्या हो जाएगी। इसीलिए टिटनेस के इंजेक्शन लगाए जाते हैं इससे आपका शरीर इन समस्याओं से लड़ सकता है और आपके शिशु के लिए भी कोई खतरा नहीं रहता है।
  • प्रेग्नेंसी के समय यह वैक्सीन वक्त जरूरी होती है क्योंकि आपके लगने वाला यह इंजेक्शन आपके शिशु तक पहुंचता है जिससे वह जन्म के कुछ सप्ताह बाद भी इस तरह के इंफेक्शन से सुरक्षित रह सकता है।

टिटनेस का इंजेक्शन लगने का समय

  • शिशु के जन्म के 6 से 8 सप्ताह बाद उसे भी ऐसा वैक्सीन लगता है जिसे डीटीपी वैक्सीन कहते हैं।
  • प्रेग्नेंसी के समय गर्भवती महिला को दो इंजेक्शन लगाए जाते हैं। प्रेग्नेंसी के प्रारंभिक दिनों में पहला इंजेक्सन लगाया जाता है और दूसरा 4 हफ्ते बाद लगाया जाता है। जब आप डॉक्टर के पास जाओगी तो वह आपको पूरी जानकारी दे देती है, कब कोनसा इंजेक्शन लगेगा।
  • यदि कोई महिला दूसरी बार गर्भवती है और पहली डिलीवरी के 2 साल बाद ही गर्भवती है तो उसे एक इंजेक्शन लगाया जाता है जिसे बूस्टर डोस कहते हैं। 2 साल से अधिक समय हो गया है तो जैसे पहली प्रेग्नेंसी में लगे थे वैसे ही 2 इंजेक्शन लगेंगे।

गर्भवती महिला को कितने टीके लगते हैं

  • गर्भावस्था में गर्भवती महिलाओं को कई टीके लगते हैं। अगर आप बच्चे की प्लानिंग कर रही हो तो आप डॉक्टर से जरूर सलाह ले वह आपको बताएगा कोनसा टिका गर्भावस्था से पहले लगते हैं और कोनसा गर्भावस्था के समय लगते हैं।

गर्भावस्था से पहले कोनसे टीके लगते हैं

MMR

  • खसरा, मम्प्स व रूबेला बीमारियों से बचने के लिए यह MMR टीका गर्भावस्था से पहले लगाया जाता है। रुबेला बीमारी की वजह से गर्भपात या फिर अन्य कोई गंभीर स्थिति बन जाती है।

हेपेटाइटिस-बी

  • हेपेटाइटिस-बी के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें कि आपको यह टीका लगवाने की जरूरत है क्या। डॉक्टर आपको सही जानकारी देगी।

गर्भावस्था के समय कौन-कौन से टीके लगते हैं

टीडैप वैक्सीन

  • टिटनेस, डिप्थीरिया और पर्टुसिस बीमारियो से गर्भवती महिला और शिशु को बचाने के लिए हर गर्भावस्था के दौरान टीडैप वैक्सीन लगवानी चाहिए। गर्भवती महिलाओं को टिटनेस टॉक्साइड (TT) के 2 टीके लगते हैं। टिटनेस टॉक्साइड टिका लगने से टिटनेस नही रहता है।
  • प्रेग्नेंसी के प्रारंभिक दिनों में पहला टिटनेस इंजेक्सन लगाया जाता है और दूसरा 4 हफ्ते बाद लगाया जाता है। यदि कोई महिला दूसरी बार गर्भवती है और पहली डिलीवरी के 2 साल बाद ही गर्भवती है तो उसे एक इंजेक्शन लगाया जाता है जिसे बूस्टर डोस कहते हैं। 2 साल से अधिक समय हो गया है तो जैसे पहली प्रेग्नेंसी में लगे थे वैसे ही 2 इंजेक्शन लगेंगे।

इंफ्लुएंजा का टीका

  • गर्भवती महिलाओं की प्रतिरक्षा प्रणाली, हृदय और फेफड़े फ्लू के कारण कमजोर हो सकती हैं। इससे उसे कोई गंभीर बीमारी होने का खतरा बना रहता है जो उसके गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी हानिकारक होता है। इनसे बचने के लिए इंफ्लुएंजा का टीका लगाया जाता है।

व्हूपिंग कफ

  • काली खांसी, निमोनिया और मस्तिष्क की सूजन जैसी बीमारी गर्भ में पल रहे शिशु के लिए खतरनाक हो सकती है इनसे शिशु को बचाने के लिए डॉक्टर गर्भावस्था के 27 और 36 सप्ताह के बीच में टिका लगाते हैं।
  • आप अपने डॉक्टर से विचार विमर्श करके ही टिका लगवाए वह आपको सही जानकारी देगी।

सोनोग्राफी टेस्ट फॉर प्रेगनेंसी

सोनोग्राफी टेस्ट फॉर प्रेगनेंसी
सोनोग्राफी टेस्ट फॉर प्रेगनेंसी
  • प्रेगनेंसी में सोनोग्राफी करवाना बहुत जरूरी होता है। कुछ लोग बोलते हैं कि सोनोग्राफी करवाने से शिशु समस्या हो सकती है ऐसा कुछ नही है प्रेगनेंसी में सोनोग्राफी करवाना सुरक्षित है। वैसे तो पूरी प्रेगनेंसी में पांच या छह सोनोग्राफी की जरूरत होती है लेकिन जिन महिलाओं की उम्र ज्यादा है जिन्हे गर्भपात की समस्या है, जिनका कुछ समय पहले ही अबॉर्शन हुआ है, जिनकी प्रेगनेंसी में समस्या होती हो, जिन्हे डायबिटीज, जिन्हे थायराइड हो उनको अधिक बार सोनोग्राफी की जाती है।

प्रेगनेंसी में सोनोग्राफी करवाने के फायदे

  1. शुरू में सोनोग्राफी करने से कन्फर्म हो जाता है कि आप प्रेगनेंट हैं या नहीं। अगर आप प्रेगनेंट हैं तो एक्टोपिक प्रेगनेंसी तो नही है जिसमें भ्रूण गर्भ से बाहर, आमतौर पर फेलोपियन ट्यूब में विकसित होने लगता है।
  2. सोनोग्राफी करवाने से डेट का पता चल जाता है जैसे आपके पीरियड के हिसाब से भ्रूण छः सप्ताह का और उसकी ग्रोथ छः सप्ताह के भ्रूण की तरह हुई है या नहीं सोनोग्राफी के फिक्स पता चल जाता है की भ्रूण कितने सप्ताह का है।
  3. गर्भवती महिला को पता चल जाता है कि उसके गर्भ में एक या जुड़वा या फिर ज्यादा शिशु पल रहे हैं क्या।
  4. अगर किसी को अंदर ब्लीडिंग हो रही है तो उसका पता चल जाता है।
  5. शिशु के दिल धड़कन के बारे मे पता चल जाता है।
  6. प्रेगनेंसी के 12 सप्ताह बाद NT SCAN किया जाता है जिसमे शिशु का न्यूकल ट्रांसलुसेंसी स्कैन किया जाता है जो डाउंस सिंड्रोम के खतरे को मापता
  7. शिशु के सभी अंग सामान्य रुप से विकसित हो रहे हैं इसका पता चल जाता है।
  8. हर बार सोनोग्राफी में आपका शिशु कैसे बढ़ रहा है यह देखना।
  9. अपरा और शिशु के बीच रक्त के प्रवाह को जांचना
  10. ग्रीवा के मुख और लंबाई को जांचना

प्रेगनेंसी में कौन सा फ्रूट नहीं खाना चाहिए

  • प्रेगनेंसी में ऐसा कोई तल नही जिसे नहीं खाना चाहिए प्रेगनेंसी में सारे फल खाने चाहिए।
  • प्रेगनेंसी में पपीता खाने के लिए मना किया जाता है लेकिन अगर पपीता अच्छे से पका है तो वह कोई नुकसान नहीं करता है।
  • कच्चा पपीता नुकसान करता है कच्चे पपीता में लेटिक्स नमक पदार्थ निकलता है। कच्चा पपीता खाने से गर्भाशय में संकुचन होने लगता है, गर्भ के अंदर की परत सिकुड़ने लगती है जिससे गर्भपात भी हो सकता है।
  • कुछ लोग आम खाने के लिए मना करते है अगर आम का दूध के साथ शेक बनाकर पियेंगे तो वह बहुत हेल्थी होगा इसीलिए प्रेग्नेंसी में आम खा सकते हैं।
  • फ्रूट का सेवन प्रेगनेंसी में जरूर करे। ऐसा कोई फल नहीं जिनका प्रेगनेंसी में सेवन नहीं कर सकते हैं।

सोनोग्राफी कैसे की जाती है

  • सोनोग्राफी के दौरान मरीज को एक मेज पर पीठ के बल लिटाया जाता है। शरीर के जिस हिस्से की सोनोग्राफी करनी है, उस पर सोनोग्राफी करने वाली डॉक्टर जेल लगा देती हैं, जिससे शरीर और प्रोब के बीच अच्छा संपर्क बन जाता है। उसके बाद स्कैनर को हाथ से जेल पर रखा जाता है और क्षेत्र को स्कैन करने के लिए उसे इधर-उधर फेरते कभी दबाते भी हैं। जिससे दर्द नही होता है। सोनोग्राफी के समय मरीज को अपनी पोजीशन बदलने के लिए भी बोला जाता है जिससे सोनोग्राफी सही से हो जाए। फिर जेल साफ करने के लिए रुई देते हैं।

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