Diabetes Diet | Type 2 Diabetes Symptoms In Hindi | Diabetes types | what is diabetes type 2 | मधुमेह क्या है? कैसे होता है | डायबिटीज़ in Hindi

हाई ब्लड शुगर लेवल को हम डायबिटीज़ यानी मधुमेह के नाम से जानते हैं. अगर इसकी जांच न की जाए, तो इससे त्वचा और आंखों से जुड़ी आम परेशानियों से लेकर ब्रेन स्ट्रोक और नर्वस सिस्टम से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है |

आओ चलो  Diabetes Diet | Type 2 Diabetes Symptoms In Hindi के बारे में विस्तार से चर्चा करते है |

  • प्रोटीन के side effect
  • प्रोटीन भोजन (Protein Rich Food)
  • कैसिन प्रोटीन

मधुमेह क्या है?

मधुमेह (डायबिटीज) में ब्लड शुगर बढ़ जाता है। डॉक्टर इसे डायबिटीज मेलाईटस कहते है। मधुमेह एक पाचन क्रिया का रोग है।

इन्सुलिन क्या है ?

इन्सुलिन एक ऐसा हार्मोन होता है जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है। शुगर हमारी कोशिकाओं में इन्सुलिन के बिना नहीं जा पाता। मधुमेह इन्सुलिन हार्मोन या तो शरीर से निकलता नहीं है या मोटापे की वजह से इन्सुलिन की मात्रा ब्लड शुगर की मात्रा से कम पड़ जाती है।

मधुमेह के प्रकार

  • टाइप 1 मधुमेह
  • टाइप 2 मधुमेह
  • गर्भावधी मधुमेह

1. टाइप 1 मधुमेह (डायबिटीज) :-

डायबिटीज में हमारे ब्लड में शुगर की मात्रा बढ़ी रहती है। टाइप 1 मधुमेह में शुगर को हमे पचाने के लिए इन्सुलिन की जरूरत होती है। इन्सुलिन को पेनक्रियाज बनाता है। टाइप 1 मधुमेह में जो पेनक्रियाज के सेल्स है जो इन्सुलिन बनाता है वो इन्सुलिन नहीं बना रहा है या बहुत कम इन्सुलिन बना रहा है। क्योंकि जो सेल्स इन्सुलिन बनाते है वे खराब हो रहे है और ये खराब ऑटो इम्यूनिटी के कारण हो रहे है यानी आपकी बॉडी का जो इम्युन सिस्टम वो खुद ही पेनक्रियाज के सेल्स को अटेक कर रहा है जिस कारण से इन्सुलिन नहीं बन रहा है या एकदम कम बन रहा है। टाइप 1 मधुमेह बच्चो व किशोरों में होता है। 10% मधुमेह टाइप 1 प्रकार के होते है। टाइप 1 के मरीजों को अपने बाकि जीवनकाल तक इन्सुलिन के इंजेक्शन लेने पड़ते है।

मधुमेह का उपचार (How To Prevent Diabetes)

2. टाइप 2 मधुमेह(डायबिटीज) :-

टाइप टू डायबिटीज को Non- insulin dependent diabetes mellitus ( NIDDM ) भी कहते है क्योंकि टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित मरीजों के शरीर में इन्सुलिन का निर्माण या तो बहुत काम होता है या फिर होता नहीं है।

 इन्सुलिन प्रतिरोध के कारण कोशिकाएं शरीर में इन्सुलिन को प्रतिक्रिया करने नहीं देती है। टाइप 2 मधुमेह के रोगियों के शरीर में ग्लूकोज कोशिकाओं में पहुंचकर ऊर्जा में परिवर्तित होने के बजाय सीधे रक्त में घुल जाता है। जिसके कारण कोशिकाओं का कार्य भी बाधित हो जाता है और ग्लूकोज से संबंधित कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।

पूरे विश्व में सभी मधुमेह के मरीजों में से 90% मरीज टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित होते है इसे स्वस्थ्य जीवनशैली व दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है और कुछ मामलों में इन्सुलिन की आवश्यकता होती हैं।

3. गर्भावधी मधुमेह :-

गर्भावधी मधुमेह गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को प्रभावित करता है |

मधुमेह के घरेलू नुस्खे

डायबिटीज़ के लक्षण

1. बहुत अधिक थकान का महसूस होना :-

मधुमेह के शुरुआती दौर में आप सारे दिन थकान महसूस करेंगे। सुबह उठते ही ऐसा लगेगा कि आपकी नींद पूरी नहीं हुई और शरीर में थकान सी महसूस होगी।

2. बार बार पेशाब लगना :-

मधुमेह होने पर आपको बार बार पेशाब आने लगता है। जब शरीर में ज्यादा मात्रा में शुगर इकट्ठा हो जाता है तो यह पेशाब जे रास्ते से बाहर निकालता है, जिसके कारण मधुमेह रोगी को बार वार पेशाब लगाने की शिकायत शुरू हो जाती है।

3. अत्यधिक प्यास लगाना :-

मधुमेह के रोगी को बार बार प्यास लगती है क्योंकि पेशाब के रास्ते से शरीर का पानी व शुगर बाहर निकल जाता है जिसके कारण हमेशा प्यास लगने जैसी स्थिति बनी रहती है।

4 आंखे कमजोर होना :-

डायबिटीज़ के मरीजों में डायबिटीज रोग की शुरुआत में ही आंखो कि रोशनी कम होने लगती है और धुंधला दिखाई पड़ने लगता है।

5. वजन कम होना :-

मधुमेह रोग की शुरुआत में ही अचानक वजन तेजी से कम होने लगता है। सामान्य दिनों की अपेक्षा आदमी का वजन कम होने लगता है।

6. जोर से भूख लगना :-

मधुमेह के मरीज का वजन तो कम होता है और भूख में भी बढ़ोतरी होती है। अन्य दिनों की अपेक्षा आदमी की भूख कई गुना बढ़ जाती है। बार बार खाना खाने की इच्छा होती है।

7. घाव का जल्दी नहीं भरना :-

अगर आपके शरीर में कहीं चोट या घाव हो जाए और यह जल्दी नहीं भरे, चाहे कोई चोटी सी खरोच ही क्यों ना हो, वह धीरे धीरे बड़े घाव में बदल जाएगी और उसमें संक्रमण के लक्षण साफ साफ दिखाई देने लगेंगे।

8. तबीयत खराब होना :-

मधुमेह मरीज के शरीर में किसी तरह का संक्रमण जल्दी से ठीक नहीं होता है। अगर आपको वायरल, खासी, जुकाम या कोई भी बैक्टिरियल इंफेक्शन हो जाए तो आपको राहत नहीं मिलेगी।

9. त्वचा के रोग होना :-

मधुमेह के शुरुआत में त्वचा संबंधी कई तरह के रोग होने शुरू हो जाते है सामान्य संक्रमण से बड़े घाव बन जाते है।

10. आनुवंशिक कारण :-

आपके परिवार में किसी अन्य सदस्य को भी मधुमेह की समस्या हो रही हो तब भी आपको सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि यह एक आनुवंशिक बीमारी है।

Diabetes Diet

मधुमेह के मरीज क्या खाए और क्या नहीं खाए (Diabetes Diet)

मधुमेह को कंट्रोल करने में हमारे डाइट की अहम भूमिका है। यदि हम डाइट को सही कर लें तो डायबिटीज को भी कंट्रोल कर सकते हैं।

आइए हम बताते है मधुमेह के रोगियों को क्या खाना चाहिए (Diabetes Diet) और क्या नहीं खाना चाहिए।

क्या नहीं खाना चाहिए :-

  • मैदा से बने प्रोडेक्ट व्हाइट ब्रेड, व्हाइट पास्ता नहीं खाए क्योंकि इनमें रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है जो कि हमारे ब्लड में जाते ही शुगर लेवल बढ़ा देता है।
  • व्हाइट राइस ने फाइबर की मात्रा बहुत कम होती है साथ ही साथ इसमें लो क्वालिटी कार्बोहाइड्रेटस होता है। जिसके कारण यह आसानी से पच जाता है और ब्लड में जाते ही शुगर लेवल बढ़ा देता है।
  • आलू या आलू से बने प्रोडेक्ट में शुगर की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। इनके खाने से हमारा डायबिटीज का लेवल बढ़ता है।
  • वैसे तो फ्रूट्स में भरपूर मात्रा में फाइबर और कार्बोहाइड्रेट होता है। लेकिन जब बात फ्रूट जूस की आती है तो बात थोड़ी सी अलग हो जाती है। फ्रूट जूस में फ्रूट शुगर होता है जो कि आपके ब्लड शुगर को बढ़ाता है। वैसे फ्रूट जूस को शुगर लेवल में फायदेमंद है।
  • रेड मीट में अनहेल्दी संत्रप्त वसा काफी मात्रा में होता है जो कि आपके हार्ट व ब्लड शुगर लेवल दिनों के लिए नुकसान दायक है।
  • सॉफ्ट ड्रिंक में बहुत ज्यादा मात्रा में शुगर होता है जो कि बॉडी के शुगर लेवल को बढ़ाता है।
  • तेल ने भुने हुआ खाना को अवॉइड करना चाहिए क्योंकि इनमें ट्रांस फैट होता है जो कि शुगर लेवल को बढ़ाता है।
  • किशमिश में नेचुरल शुगर पाया जाता है जो कि शुगर लेवल को बढ़ाता है।

क्या खाना चाहिए (Diabetes Diet) :-

  • दाल चीनी वैसे तो मसाले में आता है एक चोथाई चम्मच खाने से डायबिटीज को कंट्रोल कर सकते है। दाल चीनी का उपयोग दही, कॉफी, दलिया के साथ भी कर सकते है।
  • नट्स या अखरोट में poly unsaturated fat तथा प्रोटीन की मात्रा बहुत ही ज्यादा होती है। इसमें कार्बोाइड्रेट की मात्रा कम होने के कारण ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में सहायता करता है।
  • बीन्स में बहुत ज्यादा फाइबर होता है साथ ही साथ इसमें बहुत ज्यादा मात्रा में प्रोटीन भी होता है। जिससे कि ये फूड आपके शुगर को कम करने में मदद करता है।
  • ब्रोकली, फूलगोभी, brussel sprouts ये कुछ ऐसी सब्जी है जिनको कम मात्रा में कार्बोहाइड्रेट है जो शुगर लेवल को कंट्रोल करता है।
  • Quinoa seeds का पाचन धीरे धीरे होता है जिससे आपका ब्लड शुगर लेवल नहीं बढ़ाता।
  • पालक मैग्नीशियम का सबसे अच्छा सोर्स है मैग्नीशियम आपके ब्लड शुगर लेवल को कम करने में सबसे ज्यादा फायदेमंद है।
  • ऑलिव ऑयल में mono unsaturated fat की मात्रा बहुत ही ज्यादा होती है। यह mono unsaturated fat आपके ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करता है इसके अलावा यह तेल आपके कोलेस्ट्रोल लेवल को भी कंट्रोल करता है।
  • ओट्स में सॉल्युबल फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है जिससे इसका पाचन धीरे धीरे होता है, और आपके ब्लड में शुगर बहुत ही कम या धीरे बनता है।
  • दूध दही व पनीर में उपस्थित केल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन डी आपके शरीर को इंसुलिन सेंसेटिव बनाता है जिससे आप हाई ब्लड शुगर से बच सकते है।
  • Psyllium husk सकते इस फाइबर सप्लीमेंट डाइट में शुगर कम करने की क्षमता होती है। मधुमेह के मरीज को ईसबगोल दोपहर में खाने से आधा घंटा पहले पानी में मिलाकर पी लेना चाहिए।

CONCLUSION

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3 Comments

  1. मनीष जांगिड़

    मुजे आपकी पोस्ट bhaut अछि लगी

    • Pramod Jangid

      Thanks for appreciation

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