Complications During Pregnancy in Hindi | प्रसव के बाद समस्या | प्रसव के बाद की समस्याओं के कारण और इलाज | डिलीवरी के बाद के शारीरिक बदलाव | Complications During Pregnancy in Hindi | प्रसव के बाद समस्या

  • प्रेग्नेंट होना सभी महिलाओं के लिए खुशी का अहसास होता है।
  • लेकिन, डिलीवरी के बाद अनेक शारीरिक बदलाव भी आ जाते हैं, जिससे परेशान रहने लगती हैं।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान और बाद में महिला को अच्छी देखभाल की जरूरत होती है, जिससे सभी शारीरिक बदलावों से जल्दी छुटकारा पा सकें।
  • बच्चे के जन्म के बाद मां की जिम्मेदारियां काफी बढ़ जाती हैं। इसीलिए महिला को अपने स्वास्थ्य और शरीर की उचित देखभाल की आवश्यकता होती है।

हमे इन समस्याओं के बारे में और इनके इलाज के बारे में जानना जरूरी है आइए जानते है प्रसव के बाद समस्या के कारण और इलाज

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प्रसव के बाद की समस्याओं के कारण और इलाज [ Complications During Pregnancy in Hindi ]

1. प्रसव के बाद रक्तस्राव होना

  • डिलिवरी के तुरंत बाद थोड़ा रक्तस्राव तो होता है, लेकिन कुछ महिलाओं को अत्यधिक रक्तस्राव होता है।
  • अत्यधिक रक्तस्राव लम्बी डिलीवरी, कई बच्चों के जन्म के बाद या जब गर्भाशय संक्रमित होने पर होता है।
  • डिलीवरी के बाद गर्भाशय का सही से संकुचन न हो पाने या फिर गर्भाशय, गर्भाशय ग्रीवा या योनि में चोट होने के कारण ऐसा होता है।
  • यदि रक्तस्राव, प्रसव के एक या दो हफ्ते बाद होता है, तो रक्तस्राव प्लेसेंटा के टुकड़े के गर्भ में रह जाने के कारण भी होता है।
  • यह ऊतक सर्जरी द्वारा निकाल दिया जाता है।
  • घर आने के बाद, अगर आपको भारी रक्तस्राव हो तो तुरंत अपने डॉक्टर संपर्क करें।
  • आपके कोई गांठ हो जिसका उपचार घर नहीं होता हो, ऐसे में अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

2. गर्भाशय संक्रमण

  • ज्यादातर प्लेसेंटा, प्रसव के दौरान गर्भाशय से अलग हो जाती है और जन्म देने के बाद 20 मिनट में योनि से बाहर कर दी जाती है।
  • अगर प्लेसेंटा के टुकड़े गर्भाशय में रह जाते हैं, तो यह गर्भाशय में संक्रमण उत्पन्न कर देता है।
  • फ्लू होने पर तेज़ बुखार, तेज धड़कनें, असामान्य सफेद रक्त कोशिकाओं की मात्रा बढ़ना, गर्भाशय में सूजन और असहजता तथा गंध युक्त डिस्चार्ज आमतौर पर गर्भाशय संक्रमण के संकेत होते हैं।
  • गर्भाशय संक्रमण का इलाज आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं के कोर्स द्वारा किया जाता है।

3. किडनी संक्रमण

  • जब मूत्राशय में बैक्टीरिया फैल जाते हैं, तब किडनी संक्रमण होता है।
  • जिसमें बार बार पेशाब के लिए जाना, मूत्रत्याग की तीव्र इच्छा, तेज बुखार, बीमार सा महसूस होना, पीठ के निचले हिस्से या साइड में दर्द, कब्ज और पेशाब करते समय दर्द होने जैसे लक्षण महसूस होते हैं।
  • किडनी संक्रमण के इलाज के लिए डॉक्टर एंटीबायोटिक्स दवाओं का कोर्स करने के लिए कहते हैं।
  • मरीजों को बहुत सारा पानी पीने और किसी भी बैक्टीरिया की स्क्रीनिंग के लिए मूत्र का नमूना देने के लिए कहा जाता है।

4. पेरिनियल (योनि और मलद्वार के बीच की जगह) दर्द

  • जिन महिलाओं की नार्मल डिलीवरी होती है, उनमें पेरिनियल दर्द होना काफी आम बात है।
  • ऊतकों में प्रसव के दौरान खिंचाव या चोट लग जाती है, जिससे उनमें सूजन, चोट और दर्द महसूस होता है।
  • ओवर-द-काउंटर दर्द निवारक दवाएं इसमें मदद कर सकती हैं।
  • जब आपको ये दर्द महसूस हो, तो कीगल एक्सरसाइज करें। ये आपकी योनि की मांसपेशियों को मज़बूत करते हैं।
  • अगर योनि क्षेत्र में अत्यधिक या लगातार दर्द हो रहा है, तो व्यायाम करना बंद कर दें और डॉक्टर से परामर्श करें।

5. स्तनों में सूजन या अतिरिक्तता

  • कभी-कभी शिशु, मां के स्तनों से पूरा दूध नहीं पी पाता है।
  • उस स्थिति में दूध सूखता नहीं है बल्कि बढ़ता है।
  • जिस कारण महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
  • जब दूध आपके स्तनों में आता है तो आपके स्तन बहुत बड़े, कठोर और पीड़ादायक हो जाते हैं।
  • इसका इलाज आप स्तनों पर बर्फ लगा के कर सकती हैं।

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6. स्तन संक्रमण

  • स्तन संक्रमण होने पर स्तनों में असहजता और लालिमा हो जाती है।
  • स्तन संक्रमण, बैक्टीरिया के कारण भी हो जाता है ।
  • इससे संक्रमित होने पर तनाव, थकावट या निपल्स में दरार सी पड़ने लगती है।
  • जिसके परिणामस्वरूप बुखार, ठंड लगना, थकान, सिरदर्द या मतली और उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए डॉक्टर के पास जरूर जाए।

7. भरी हुई नलिकाएं

  • भरी हुई दुग्ध नलिकाओं के कारण, लालिमा, दर्द, सूजन या स्तन में गांठ पैदा हो सकती है।
  • लेकिन ये ही लक्षण मैस्टाइटिस के होते हैं। लेकिन इसमें फ्लू जैसे लक्षण, स्तन संक्रमण, दरारें, आदि नहीं होते हैं।
  • इसके उपचार के लिए लगातार स्तनों की मालिश करें, गर्म पानी लगाने से इस समस्या का समाधान हो सकता है।
  • यदि आपके गांठ है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें।

8. स्ट्रेच मार्क्स

  • स्ट्रेच मार्क्स प्रेग्नेंसी के दौरान कई महिलाओं के स्तनों, जांघों, कूल्हों और पेट पर दिखाई देते हैं।
  • ये लाल निशान, हार्मोनल परिवर्तन और त्वचा में खिंचाव के कारण होते हैं जो प्रसव के बाद तक रहते हैं।
  • किसी किसी के गायब नहीं होते हैं।
  • कई महिलाएं इन्हें हटाने के लिए विशेष प्रकार की क्रीम, लोशन और तेलों का उपयोग करती हैं।

9. बवासीर और कब्ज़

  • बवासीर और कब्ज, बढ़े हुए गर्भाशय और गर्भ के निचले हिस्से की नसों में दबाव पड़ने से बढ़ जाते हैं।
  • ये दोनों समस्याएं डिलीवरी के बाद महिलाओं में होने लगती हैं।
  • ओवर-द-काउंटर मिलने वाले मलहम
  • स्प्रे के साथ खाने में फाइबर युक्त चीज़ें
  • तरल पदार्थ, आमतौर पर कब्ज और बवासीर की सूजन में आराम पहुंचाते हैं।

10. बाल झड़ना

  • डिलीवरी के बाद जब आपका बच्चा 6 महीने का हो जाता है।
  • तब आपके बालों की चमक कम हो जाती है साथ ही साथ अधिक बाल झड़ने लगते हैं।

11. डिलिवरी के बाद डिप्रेशन

  • हार्मोनों के स्तर में परिवर्तन, नवजात शिशु की देखभाल करने की नई जिम्मेदारी आ जाती है।
  • जिससे कई महिलाओं को चिंता या गुस्से का सामना करना पड़ता है।
  • अधिकतर के लिए, यह मनोदशा और हल्का डिप्रेशन कई दिनों या सप्ताह तक चलता है।
  • यह स्थिति आमतौर पर प्रसव के तीन महीने बाद स्पष्ट हो जाती है।
  • इसके इलाज के लिए सबसे पहले, पारिवारिक और करीबी मित्रों का समर्थन प्राप्त करें।
  • अपनी भावनाओं को उनके साथ साझा करें, और अपने शिशु की देखभाल करने में उनकी मदद लें।
  • यदि डिप्रेशन के परिणामस्वरूप आपकी बच्चे में रुचि कम होना।
  • आत्महत्या या हिंसक विचारों, असामान्य व्यवहार आदि लक्षण सामने आते हैं, तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।

12. सेक्स के दौरान असुविधा

  • डिलिवरी के बाद महिलाओं को सेक्स के दौरान असुविधा होती है।
  • नार्मल डिलीवरी के बाद, योनि ऊतकों के पूरी तरह से ठीक होने तक सेक्स न करें।
  • आम तौर पर डॉक्टर प्रसव के बाद चार से छह हफ़्तों तक सम्भोग न करने की सलाह देते हैं।
  • सिजेरियन डिलीवरी के बाद, भी आपके डॉक्टर आपको कम से कम छह हफ्ते तक इंतजार करने की सलाह देंगे।

13. गर्भावस्था से पहले के आकार को प्राप्त करना

  • गर्भधारण के बाद वजन कम करने, कम हुई ऊर्जा वापस लाने
  • तनाव को दूर करने और मांसपेशियों में ताकत लाने का सबसे अच्छा तरीका व्यायाम है।
  • जब तक आपकी सिजेरियन डिलीवरी, गर्भावस्था में जटिलताओं आदि की सम्भावना न हो, तब तक आप व्यायाम कर सकती हैं।
  • यदि आप गर्भावस्था के दौरान और पहले व्यायाम करती हैं।
  • आपको प्रसव के बाद फिटनेस का भी ज़रूर ध्यान होगा।
  • आप व्यायाम ज़रूर करेंगी, लेकिन तुरंत तेज़ एक्सरसाइज जैसे कूदने आदि की कोशिश न करें।

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