बेल खाने के फायदे  | BAEL FRUIT BENEFITS AND HISTORY

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आओ चलो बेल खाने के फायदे  | BAEL FRUIT BENEFITS AND HISTORY के बारे में विस्तार से चर्चा करते है |

बेल की उत्पत्ति

बेल  एक ऐसा ओषधीय पौधा हैं जिसे भगवान शिव का रूप माना जाता है। इसे भारत में बहुत से नामो से जाना जाता हैं जैसे – बील, बेल, बेलपत्र, श्रीफल,सदा फल इसका वानस्पतिक नाम एगले मार्वेलोस अन्य नाम सांडिलियो इत्यादि। इसका संस्कृत नाम बिल्व हैं।धार्मिक परंपरा में बिल्व के पेड़ की जड़ में लिंग रूप महादेव का वास हैं इसलिए पेड़ की जड़ में महादेव का पूजन किया जाता हैं।

शिवपुराण में लिखा है कि बिल्व की जड़ का पूजन या जल चडाता है उसका कल्याण निश्चित हैं और उसे सब तीर्थो में स्नान का फल मिल जाता हैं।

बेल की उत्पत्ति :- स्कन्द पुराण के अनुसार एक बार देवी पार्वती ने अपनी ललाट से पसीना पोंछकर फेका जिसकी कुछ बूंदें मंधार पर्वत पर गिरी जिससे बिल्व वृक्ष की उत्पत्ति हुईं देवी पार्वती द्वारा उत्पन्न होने के कारण यह महादेव का प्रिय हैं।

बेल पत्र तोड़ने का मंत्र

मंत्र – अमृतोद्धव श्रीवृक्ष महादेव प्रिय: सदा।
ग्रहामी तव पत्रानी शिव पुजार्थ मादरात।।
(अमृत से उत्पन्न सोदर्य व ऐश्वर्यपूर्ण वृक्ष महादेव को हमेशा प्रिय हैं
भगवान शिव की पूजा के लिए हैहे वृक्ष मैं तुम्हारे पत्र तोड़ता हू।)

बेल पत्र कब नहीं तोड़े

अमावस्या, सक्रांति के समय, चतुर्थी, अष्ठमी, नवमी और चतुर्थी तिथियां तथा सोमवार के दिन बिल्व पत्र तोडना वर्जित हैं प्रयास करे की इन दिनों से पहले ही बिल्वपत्र तोड़ लें

बेल के तथ्य (Fact)

बता दे की एक हजार कनेर के फूल को चड़ाने का फल एक बेल को चड़ाने से मिल जाता हैं।

{ बेल खाने के फायदे} बेल पत्र एक ऐसा पत्ता है जो कभी भी बासा नहीं होता हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि यदि बेलपत्र न उपलब्ध हो तो किसी दूसरे के चड़ाए बेल पत्र को भी धोकर कई बार पूजा में प्रयोग किया जा सकता है। इसे पुराणों के अनुसार 11 दिनों तक चड़ाया जा सकता हैं।

बेल के फल में पोषक तत्व

लगभग मात्रा 1 फल में
प्रोटीन – 1.8 ग्राम
कैलोरी – 1.37 ग्राम
फास्फोरस – 50 ग्राम
खनिज लवण – 1.7 ग्राम
कार्बोहाइड्रेट – 31.8 ग्राम
विटामिन – B1,B2

और पढ़ें:बेल पत्र के पत्ते के फ़ायदे और उपयोग

और पढ़ें: बेल फल के फ़ायदे

बेल फ़ल गरम या ठंडा

बेल का फल 12 महीने मिलता है और इसकी तासीर गर्म होती है। फिर भी अधिकतर लोग इसे गर्मी उपयोग करते और इसका ज्युस या शरबत गर्मी में मिलता है। अब लोग कहेंगे की तासीर ने गरम होता है फिर भी गर्मी में ही ज्यादा उपयोग क्यों आता है। आयुर्वेद की सभी संहिता के हिसाब से बेल का फल नेचर में गरम बताया गया है।

आयुर्वेद में बेल के फल की तीन स्टेज होती है।
1 बाल फल (कच्चा फल)
2 अर्धपक्व फल
3 हुआ

बाल फल (कच्चा फल)
यह फल भुख बढ़ाने और पाचन क्रिया को अच्छा करने वाला है। यह चिकना होता है और गर्म होता है।

अर्धपक्वा फल
यह भी पाचन क्रिया और हृदय विकार में लाभदायक है।

पका फल
यह भारी और गर्म होता है।पका हुआ बेल का फल खाने में मीठा होता है और कच्चा फल कसैला लगता है।

आयुर्वेद में कोई भी फल बहुत सारी डिटेल दी गई है। अर्थात उसका रस, वीर्य, विपात, कर्म आदि देखकर डेसाइड होता है कि ठंडी है या गर्म । किसी एक आधार पर DESIDE नहीं होता है।आयुर्वेद के अनुसार जब किसी को दस्त(लूजमोसन) होता है तो बिल्व के फल का रस दिया जाता है।
बेल फल का शर्बत या ज्यूस बाजार में मिलता है उसमे बिल्व फल के साथ साथ और भी सामग्री होती है।
जैसे – मिश्री या शक्कर ,मसले,पानी आदि से उसकी गर्मी कंट्रोल हो जाती है। आप गर्मी में ऐसे ही बेलफल का उपयोग कर सकते है।

बेल के पत्ते और उसकी जड़ को आयुर्वेद के अनुसार ठंडा बताया गया है।

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