• क्या आपको पता है दुनियां में सर्वप्रथम सेब कहां उगाए गए थे?
  • क्या आपको पता है सेब के नुक़सान
  • सेब पानी में तेरता ही क्यो है?
  • सेब का लाल रंग किसके कारण होता है ?  अगर नहीं पता तो हम आपको बताते है l

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दुनियां में सर्वप्रथम सेब कहां उगाए गए थे?

वैज्ञानिकों के अनुसार सेब 5000 साल पहले मध्य एशियाई देश कज़ाख़िस्तान में पैदा हुए थे. यहीं से ये बाक़ी दुनिया तक पहुंचे। सेब का पहला पेड़
कज़ाख़िस्तान की पहाड़ियों में जन्मा था।

सेब का भारतीय इतिहास

माना जाता है कि सेब की उत्पत्ति मध्य एशिया के कज़ाख़िस्तान के जंगलों में हुई ओर वही से बाकी दुनिया में फेला। भारत में इसकी उत्पत्ति सिकंदर के भारत में आने से हुई और उसी के जरिए भारत समेत सब जगह लोकप्रिय हुआ।

आओ चलो सेब के बारे में विस्तार से चर्चा करते है

सेब की 7500 से अधिक किस्में हैं और हर एक का अलग-अलग उपयोग किया जाता है।सेब की पुरानी जंगली प्रजाति मलुस सिएवरसि आज भी मध्य एशिया में पाई जाती है। यह Rosaceae (रोजेसी) परिवार का सदस्य है।

*वैज्ञानिक नाम – मलुस डोमेस्टिका

* सेब का सांस्कृतिक महत्व
इंग्लैंड में इस फल को देवताओं द्वारा दिया गया उपहार मानते हैं। यह इंग्लैंड में जर्मन लोगों के शुरुआती समय में बने कब्र में पाया गया। जो एक प्रतीक के
रूप में बनाया जाता

सेब के नुक़सान

  • सेब का सेवन वैसे तो सुरक्षित है, लेकिन अधिक मात्रा में खाने से आपको सेब के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। कई लोगों को कुछ फलों के पराग से भी एलर्जी हो सकती है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में पोलेन एलर्जी कहा जाता है। कई लोगों को सेब का अधिक सेवन करने से वजन कम हो जाता है क्योंकि इसमें कोई फैट नहीं होता।
  • सेब खाने से पहले उसके बीज को सावधानी जरूर हटा देना चाहिए क्योंकि सेब के बीज में अमिगडलिन नाम का एक तत्व होता है जो पेट के अंदर पाए जाने वाले एंन्जाइम के संपर्क में आते ही सायनाइड बनाने लगता है। हालांकि जरूरी नहीं है कि ऐसा हो लेकिन अगर कभी साइनाइड बन जाता है तो यह इंसान को
    बीमार बना सकता है यहां तक कि साइनाइड की ज्यादा मात्रा की वजह से इंसान की मौत भी हो सकती है।

सेब से जुड़े कई रोचक बातें :-

  • Apple company के owner ने भी सेब का ही लोगो अपनी company के लिए चुना।
  •  सबसे पहले सेब की खोज अलेक्जेंडर ने की।
  •  दुनिया का सबसे महंगा सेब सेकाई इची है जो जापान में पाया जाता है जिसकी कीमत 21 डाॅलर है जिसकी भारतीय कीमत लगभग 1500 रूपये है वो भी एक सेब की जो 900 gm का होता है। भारत में 1500
    रूपये में 15 से 17 किलो सेब आ जाएंगे।
  • सर आइजक न्यूटन ने भी गुरुत्वाकर्षण का नियम भी तब दिया जब उनके सिर पर सेब गिरा था।

सेब पानी में तेरता ही क्यो है?

सेब में 25% पानी होने के कारण वह पानी में तेरता है।

सेब का लाल रंग किसके कारण होता है ?

एन्थोसायनिन के कारण

एंथोसायनिन क्या है? – एन्थोसायनिन पौधों में पाए जाने वाले लाल-बैंगनी-नीले फ्लेवोनोइड वर्णक को संदर्भित करता है। यह एक पानी में घुलनशील अणु है। इसकी मूल कोर संरचना एक फ्लेवियम आयन है। यह पौधों की संरचनाओं की बाहरी परत में पाया जा सकता है जैसे कि फल, फूल, पत्ते, तने और जड़ें। सायनाइडिन पौधों में पाया जाने वाला प्रमुख एंथोसाइनिन है। पेओनिडिन, डेल्फिनिडिन, पेटुनीडिन, पेलार्गोनिडिन और माल्विडिन एंथोसायनिन के कुछ उदाहरण हैं। सेब,अंगूर, अकाई, ब्लूबेरी, बिलबेरी, ब्लैकक्रूरेंट, चेरी और पर्पल कॉर्न ऐसे फल हैं जिनमें एंथोसाइनिन की मात्रा अधिक होती है।
एंथोसायनिन क्या है
एन्थोसायनिन पौधों में पाए जाने वाले लाल-बैंगनी-नीले फ्लेवोनोइड वर्णक को संदर्भित करता है। यह एक पानी में घुलनशील अणु है। इसकी मूल कोर संरचना एक फ्लेवियम आयन है। यह पौधों की संरचनाओं की बाहरी परत में पाया जा सकता है जैसे कि फल, फूल, पत्ते, तने और जड़ें। सायनाइडिन पौधों में पाया जाने वाला प्रमुख एंथोसाइनिन है। पेओनिडिन, डेल्फिनिडिन, पेटुनीडिन, पेलार्गोनिडिन और माल्विडिन एंथोसायनिन के कुछ उदाहरण हैं। अंगूर, अकाई, ब्लूबेरी, बिलबेरी, ब्लैकक्रूरेंट, चेरी और पर्पल कॉर्न ऐसे फल हैं जिनमें एंथोसाइनिन की मात्रा अधिक होती है।

सेब केसे चुने?

सेब ऐसा फल है जो कई बीमारियों से बचाता है, तभी डॉक्टर्स भी कहते हैं “An apple a day keeps a doctor away”. मतलब जो रोजाना एक सेब खाएगा वो बीमार नहीं होगा। सेब भी रबी व खरीब की फसल जैसे मौसमी फल है और यह अगस्त से अक्टूबर के मौसम में ही मार्केट में फ्रेश मिलते हैं। इसके अलावा आप जो सेब खरीदकर साल भर खाते हैं, वो Cold storage वाले होते हैं। अगर आप सेब की चमक देखकर इसे खरीदते है तो ऐसी गलती ना करें क्योंकि इसके ऊपर एथिलीन का छिड़काव किया जाता है जो सेब को चमकदार बनाता यही चमकदार सेब जो लगभग 50 रुपये किलो होता है वही बाजार में 100-150 रूपये किलो मिलता है। और हम सोचते हैं कि जितना महंगा सेब उतना ही अच्छा लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता।

कैसे पहचाने कि सेब पुराना है या नया

इसके छिलके को ऊपर से रगड़कर देखें तो समझ आएगा कि ये पुराना सेब है ऐसे सेब अंदर से खराब निकल सकते हैं।अच्छे सेब की पहचान यह है कि उसमें से अच्छी खुशबू आएगी और छिलके पर किसी केमिकल की परत नहीं होगी। साथ ही कम चमकीला होगा। साथ ही अगर आप अगस्त से नवंबर के मध्य सेब
खरीदते हैं तो वह नया ही होगा क्योंकि सेब का उत्पादन अगस्त से अक्टूबर तक ही होता है जो नवंबर तक प्राकृतिक रहते है। परन्तु प्रमुखत: यह देखा जाता है
कि सेब हमें लगभग पूरे साल तक मिलता है वो cold storage का होता है जो कहीं ना कहीं हमारी सेहत पर सेब के नुक़सान  विपरीत प्रभाव डालता है।

आपको सेब के नुक़सान | सेब पानी में तेरता ही क्यो है? | सेब का लाल रंग किसके कारण होता है ? | यह जनकारी कैसी लगी कमेंट बॉक्स ने लिखकर जरूर बताए | कोई जानकारी रह गई और आपके कोई प्रश्न हो तो कमेंट बॉक्स में लिखें हम जल्द से जल्द आपको जवाब देने की कोशिश करेंगे।
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