7th Month Pregnancy Care in Hindi | गर्भ में बच्चे की हलचल | नॉर्मल डिलीवरी के लिए घी कोन से महीने खाए | प्रेग्नेंसी में बादाम खाने के फायदे | 7th Month Pregnancy Care in Hindi | गर्भ में बच्चे की हलचल

प्रेग्नेंसी के सातवें महीने में बच्चे का शारीरिक विकास

  • सातवें महीने में बच्चे की लंबाई 33 से 42 सेमी तक होगी।
  • बच्चे का वजन एक किलोग्राम से 1.3 किलोग्राम तक होगा। लंग्स अच्छे से डेवलपमेंट हो जाएंगे।
  • सोने का रूटीन सेट हो जाएगा। गर्भ में बच्चे की हलचल महसूस होती है।

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प्रेग्नेंसी में बादाम खाने के फायदे

  • गर्भवती महिलाओं को अपने शरीर की आवश्यकता से अधिक आहार की आवश्यकता होती है।
  • गर्भवती का शरीर माँ और बच्चे दोनों की पोषक तत्वों की जरूरतों को पूरा करने के लिए चौबीसों घंटे काम करता है।
  • इसीलिए ध्यान रखे कि गर्भवती महिला को पौष्टिक भोजन करना चाहिए जो मा और बच्चे की वृद्धि में मदद करता हो।
  • बादाम एक ऐसा खाद्य पदार्थ हैं जो विटामिन और खनिजों से भरपूर होता है।
  • बादाम के सेवन से माँ के शरीर का वजन भी नहीं बढ़ता और शरीर में पोषक तत्वों की भी पूर्ति हो जाती है
  • जिससे गर्भ में पल रहे शिशु को भी पोषक तत्व मिल जाते है।

बादाम कैसे खाए

  • शाम के समय 6-7 बादाम भिगो दें उन्हे सुबह छीलकर खाले।
  • शाम के लिए सुबह 6-7 बादाम भिगो दें उन्हे शाम के समय छीलकर खाले। इसी प्रकार रोजाना बादाम का सेवन करें।

बादाम पोषक में तत्व

1. प्रोटीन

  • बादाम में उच्च प्रोटीन बढ़ते बच्चे में मांसपेशियों के स्वस्थ विकास में मदद करती है।
  • यह प्रसव पीड़ा से निपटने के लिए मां में ताकत पैदा करता है। यह

2. विटामिन ई

  • बादाम में विटामिन ई होता है यह बच्चे के बालों और त्वचा के स्वस्थ निर्माण में मदद करता है।
  • कहा जाता है कि गर्भवती महिला को बादाम के सेवन से चमकदार त्वचा प्राप्त होती है।

3. मैंगनीज

  • बादाम में मैंगनीज होता है। मैंगनीज की सामग्री मजबूत और स्वस्थ हड्डियों के निर्माण में भी मदद करती है।

4. कैल्शियम

  • बादाम कैल्शियम से भरपूर होते हैं
  • यह गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप और प्री-एक्लेमिया के जोखिम को कम करने में मदद करता है।
  • बच्चे की हड्डी और दांत के निर्माण के लिए भी कैल्शियम आवश्यक है।

5. फाइबर

  • एक गर्भवती महिला के आहार में फाइबर की मात्रा अधिक होनी चाहिए क्योंकि यह मल त्याग को नियंत्रित करता है।
  • भोजन के आसान पाचन में मदद करता है। यह कब्ज के खतरे को कम करता है। बादाम फाइबर का स्रोत हैं।

6. मैग्नीशियम

  • बादाम में मैग्नीशियम की मात्रा केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के उचित गठन और कामकाज में मदद करती है।
  • यह मल त्याग को नियमित करने में भी मदद करता है।

7. फोलेट

  • बादाम में फोलेट सामग्री मस्तिष्क के स्वस्थ गठन और बच्चे के तंत्रिका तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है।
  • गर्भावस्था के दौरान बादाम के बहुत फायदे हैं
  • फिर भी इनका सेवन करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करना उचित है क्योंकि इससे कुछ मामलों में एलर्जी भी हो सकती है।

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नॉर्मल डिलीवरी के लिए घी कोन से महीने खाए

  • सभी गर्भवती महिलाए चाहती है कि उनकी डिलीवरी नॉर्मल हो।
  • नॉर्मल डिलीवरी से उन्हे ज्यादा तकलीफों सामना नहीं करना पड़ता है। वह जल्दी रिकवर हो जाती है।
  • आइए जानते हैं नॉर्मल डिलीवरी के लिए घी कोन से महीने खाए
  • देसी घी के गर्भावस्था में बहुत सारे फायदे हैं।
  • आयुर्वेद के अनुसार गर्भवती महिला गर्भावस्था में देसी घी का सेवन करती हैं।
  • घी से उसे प्रसव पीड़ा से लडने में शक्ति मिलती है। साथ ही साथ उसका शिशु भी स्वस्थ्य पैदा होता है।
  • आयुर्वेद के अनुसार अगर गर्भवती महिला सातवां महिना खत्म होते ही देसी घी सेवन शुरू कर देती है तो नॉर्मल डिलीवरी के चांसेज बढ़ जाते हैं।
  • देसी घी के सेवन से गर्भाशय की दीवारें चिकनी हो जाती है जिससे शिशु नीचे की और आसानी से सरक जाता है।
  • फिर नॉर्मल डिलीवरी होने में काफी हद तक मदद मिलती है।
  • गर्भावस्था के शुरू से ही देसी घी का सेवन करना बहुत लाभदायक है।
  • लेकिन सातवें महीने के खत्म होते ही देसी घी का सेवन तरल चीजों में जैसे दाल, सब्जी, और हल्के गर्म दूध में डालकर करें।
  • आठवें महीने के शुरू से ही दिन में दो चम्मच देसी घी का सेवन करना चाहिए।
  • जब आपका नौवा महीना शुरू होता है देसी घी की मात्रा बढ़ा दे तब आप दिन में चार चम्मच देसी घी का सेवन करें।
  • देसी घी का सेवन तीन टाईम सुबह दोपहर और शाम को करे।

मुनक्का और दूध के फायदे

प्रेग्नेंसी में देसी घी का सेवन ज्यादा करने के नुकसान

  • तीन से चार चम्मच देसी घी से ज्यादा नहीं करे।
  • इससे आपका वजन बढ़ जाएगा जिससे नॉर्मल डिलीवरी के चांस घट जाएंगे।
  • आपका कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है मोटापा आ सकता है। ज्यादा सेवन ब्लड प्रेशर हाई हो सकता है।
  • जिससे नॉर्मल डिलीवरी मे समस्या आ सकती है।
  • देसी घी का सेवन निश्चित और नियमित मात्रा के अनुसार करे।

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